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Bihar NGOs

NGOs of Bihar – Non Governmental Organisations of Bihar – NPOs of Bihar Non Profit Organisations of Bihar

Socio-economic conditions of the rural areas of Bihar is not good, literacy is at very lower status. Living standard of people in rural areas is very poor. Most of the people can not access education and health facilities in Bihar. Apart from all these, there are various groups of social change makers working in groups in the form of non-profit and non-governmental organisations. These groups of social change makers have been working hard with full dedication and determination for the development and upliftment of the backward and downtrodden section of the society.
Various NGOs has been working for the women empowerment, development and on women related issues. The groups of social change makers has been working for almost all the problem related to women from societal evils responsible for their pathetic conditions to their worst health status. Medical camps for routine health checkups, on value of hygiene for good health, awareness camps on sexually transmitted diseases, reproductive tract infections, HIV AIDS, tuberculosis and other communicable diseases, on exclusive breast feeding to newborn up to 6mnths from birth, antenatal and postnatal care, motivating them for use of contraceptives and also teaching them about family planning methods and medical termination of pregnancy under the guidance of medical practitioners.
Camps has been organised by various NGOs to guide the tribal women and to provide them legal help free of cost. Apart from all these basic education has also been provided to the illiterate women and they are also motivated to allow there girls to go to school by explaining them the role of education in the life of a girl in this feudal set up of society. Education has been provided free of cost to the girls of scheduled tribes and rural areas to empower them educationally.
Number of non- profit organisations have been working for the children; some NGOs are especially working on rag- pickers. Their main focus is to educate to the rag pickers and to the students who had dropped out their studies just because to poor economic conditions. These NGOs are working to provide them quality education and to provide them basic facilities free of cost to be get educated. These groups of social change makers are also working for the women and children suffering from HIV/AIDS.
Health check up camps have been organised for the children for their overall development. Health related teachings are being provided to the children in the form of street plays, puppet shows and in other interesting ways to teach them about value of personal hygiene for good health, teaching them about cleaning of surroundings through NSS camps etc. Various other NGOs have been working for the children of weaker section to provide them education, shelter and food for their overall development equal to the other children in the society.
NGOs have been working to train the tribal women and men for the small scale home based work as another source of income. To improve their economic status various kinds of workshops and training camps have been organised by the NGOs and women and men voluntarily participate to learn new things. These groups are working against drug addiction and also encourage the people to join the de-addiction centres and de-addiction camps and provides them occupational therapy and rehabilitation facilities. Various de-addiction camps has been organised by NGOs for both addicts and non- addicts to aware the people about the harms of drug addiction and to motivate them to stop taking drugs.
NGOs have needed to work on the issues of the environment safety, cleaning of the surroundings, pollution control and safety of natural resources. There is a need work for the elderly people, mentally and physically challenged people, orphans and to save the girl child and against the illegal abortions. NGOs need to concentrate on the health related issues of the mine workers as number of poor labourers are dying due the work oriented diseases and other occupational hazards. As the animals and birds play an important role in human life, NGOs need to work for animal and birds safety.
For the continued development of that vulnerable, downtrodden and disadvantaged section of the society, these groups of social change makers need to be taken forward with hard work with passion, dedication and determination.

बिहार एनजीओ – बिहार के स्वयं सेवी संगठन – बिहार की स्वयं सेवी संस्थाएं

बिहार के ग्रामीण क्षेत्र की सामाजिक-आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है, साक्षरता बहुत कम है. ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों का जीवन स्तर बहुत खराब है. अधिकांश लोग बिहार में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं तक नहीं पहुँच सकते हैं. इन मुद्दों को लेकर बिहार के स्वयं सेवी संस्थान और गैर-सरकारी संगठन सामाजिक परिवर्तन की दिशा में कार्य कर रहे हैं. सामाजिक परिवर्तन के उद्देश्य से जुड़े ये संसथान समाज के पिछड़े और दलित वर्ग के विकास और उत्थान के लिए काफी समर्पण और दृढ़ संकल्प के साथ विभिन्न कार्यक्रम कर रहे हैं.
विभिन्न गैर सरकारी संगठन महिला सशक्तिकरण, विकास और महिलाओं से संबंधित मुद्दों पर काम कर रहे हैं. सामाजिक परिवर्तन की दिशा में कार्यरत समूह महिलाओं की सामाजिक समस्याओं और उन अन्य विभिन्न समस्याओं व मुद्दों पर काम कर रहे हैं जो क्षेत्र की दयनीय स्थितिके लिए व लोगों की सबसे खराब स्वास्थ्य स्थिति के प्रमुख कारण हैं. नियमित स्वास्थ्य जांच के लिए चिकित्सा शिविर, अच्छे स्वास्थ्य के लिए स्वच्छता कायम रखने, विभिन्न रोगों के बारे में जागरूकता शिविर, प्रजनन के दौरान संक्रमण, एचआईवी एड्स, तपेदिक और अन्य फ़ैलाने वाले रोग, जन्म से लेकर 6 माह तक के नवजात शिशु के विशेष स्तनपान पर, प्रसवपूर्व और प्रसवोत्तर देखभाल, गर्भ निरोधकों के उपयोग के लिए उन्हें प्रेरित करना और मेडिकल प्लानर्स के मार्गदर्शन में परिवार नियोजन के तरीकों और गर्भावस्था की चिकित्सा समाप्ति के बारे में उन्हें सिखाना कुछ कार्यक्रम हैं जिन्हें एनजीओ बिहार में कर रहे हैं.
ग्रामीण महिलाओं का मार्गदर्शन करने और उन्हें मुफ्त में कानूनी सहायता प्रदान करने के लिए विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों द्वारा शिविर आयोजित किए गए हैं. इन सभी के अलावा अशिक्षित महिलाओं को साक्षर बनाने के कार्यक्रम भी चलाए जा रहे है और उन्हें समाज की सामंती व्यवस्था में एक बालिका के जीवन को बेहतर करने उसको शिक्षित करने की उपयोगियता समझाकर वहाँ बालिकाओं को स्कूल जाने की अनुमति देने के लिए भी प्रेरित किया जाता है. ग्रामीण क्षेत्रों में बालिकाओं को शैक्षिक रूप से सशक्त बनाने के लिए विद्यालय स्तर पर बालिकाओं को मुफ्त शिक्षा प्रदान करने की जानकारी देकर भी उनको प्रेरित व प्रोत्साहित किया जाता है.
बिहार की गैर-लाभकारी संस्थान बच्चों के कल्याण के लिए काम कर रही है. कुछ एनजीओ विशेष रूप से बाल कल्याण के मुद्दों पर काम कर रहे हैं. उनका मुख्य ध्यान कचरा बीनने वालों व मजदूरी करने वाले उन छात्रों को शिक्षित करना है, जो सिर्फ इसलिए पढ़ाई छोड़ देते हैं क्योंकि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होती है. ये एनजीओ उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने और उन्हें शिक्षित करने के लिए मुफ्त में बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने के लिए काम कर रहे हैं. सामाजिक परिवर्तन की दिशा में कार्य करने वाले ये संगठन महिलाओं और बच्चों के लिए स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर भी काम कर रहे हैं.
बच्चों के समग्र विकास के लिए स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित किए जाते हैं. बच्चों को नुक्कड़ नाटक, कठपुतली शो और अन्य रोचक तरीकों से बच्चों को अच्छे स्वास्थ्य के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता के बारे में, उन्हें एनएसएस शिविरों आदि के माध्यम से परिवेश की सफाई के बारे में सिखाने के लिए स्वास्थ्य संबंधी शिक्षा प्रदान की जा रही है. कमजोर वर्ग के बच्चों को समाज में अन्य बच्चों के बराबर उनके समग्र विकास के लिए शिक्षा, आश्रय और भोजन प्रदान करने के लिए विभिन्न अन्य गैर-सरकारी संगठन काम कर रहे हैं.
गैर-सरकारी संगठन दलित महिलाओं और पुरुषों को विभिन्न स्रोतों से आय अर्जित करने के प्रशिक्षित भी दे रहे हैं. ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए गैर-सरकारी संगठनों द्वारा विभिन्न प्रकार की कार्यशालाओं और प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन कियाजाता है जिनमें महिलाएं और पुरुष स्वेच्छा से नई जानकारी लेने व सीखने के लिए भाग लेते हैं. स्वयं सेवी संगठन मादक पदार्थों की लत के खिलाफ काम कर रहे हैं और लोगों को नशामुक्ति केंद्रों और नशामुक्ति शिविरों में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करते हैं. जरूरतमंद लोगों को चिकित्सा और पुनर्वास सुविधाएं प्रदान करने के कार्यक्रम भी संस्थान चलाते हैं. नशामुक्ति के लिए विभिन्न नशामुक्ति शिविरों का आयोजन किया जाता है, ताकि लोगों को नशे की लत के नुकसान के बारे में जागरूक किया जा सके और उन्हें नशा करने से रोकने के लिए प्रेरित किया जा सके.
एनजीओ पर्यावरण सुरक्षा, क्षेत्र की सफाई, प्रदूषण नियंत्रण और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के मुद्दों पर काम करने की जरूरत को अंजाम देते है लेकिन इन मुद्दों पर और कार्य करने की जरुरत महसूस की जा रही है. मानसिक रूप से और शारीरिक रूप से अक्षम लोगों, अनाथों और बालिकाओं को बचाने और बुजुर्ग लोगों के कल्याण के लिए भी संस्थानों को क्षेत्र में कार्यक्रम हाथ में लेने की आवश्यकता महसूस की जाती है. गैर-सरकारी संगठनों को खान श्रमिकों के स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है क्योंकि काम से सम्बंधित बीमारियों और अन्य खतरों के कारण गरीब मजदूर इससे सीधे प्रभावित हो रहे हैं. चूंकि पशु और पक्षी मानव जीवन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, एनजीओ को पशु और पक्षियों की सुरक्षा के लिए काम करने की आवश्यकता होती है.
समाज के उस कमजोर, दलित और वंचित वर्ग के निरंतर विकास के लिए, सामाजिक परिवर्तन निर्माताओं के इन समूहों को जुनून, समर्पण और दृढ़ संकल्प के साथ कड़ी मेहनत के सफलता की ओर आगे ले जाने की आवश्यकता है.



Bihar NGOs was last modified: November 21st, 2020 by NGOs India
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